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RSS ने कहा- पीएम मोदी और अमित शाह राज्‍यों में हमेशा नहीं दिला सकते जीत, बीजपी भी करे कड़ी मेहनत

RSS ने कहा- पीएम मोदी और अमित शाह राज्‍यों में हमेशा नहीं दिला सकते जीत, बीजपी भी करे कड़ी मेहनत

राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ ने बीजेपी को संगठन के स्‍तर पर भी दिल्‍ली में कड़ी मेहनत करने का सुझाव दिया है.

राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) के अंग्रेजी मुखपत्र ऑर्गेनाइजर (Organiser) में छपे संपादकीय में बीजेपी (BJP) को दिल्‍ली में जमीन पर फिर से काम करने और संगठन को मजबूत करने का सुझाव दिया गया है. साथ ही कहा गया है कि पार्टी को स्‍थानीय लोगों की जरूरतों को (Local Aspirations) समझकर उन पर बात करनी चाहिए.

नई दिल्‍ली. राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) ने सलाह दी है कि बीजेपी (BJP) को दिल्‍ली में संगठन का पुनर्गठन करना चाहिए क्‍योंकि राज्‍यों के चुनावों में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) हमेशा जीत नहीं दिला सकते हैं. संघ के अंग्रेजी मुखपत्र ऑर्गेनाइजर (Organiser) में छपे संपादकीय में दिल्‍ली विधानसभा 2020 (Delhi Assembly Election 2020) में बीजेपी की रणनीति को दोषपूर्ण बताया गया है. दिल्‍ली में 8 फरवरी को मतदान हुआ और 11 फरवरी को मतगणना में आम आदमी पार्टी (AAP) ने 62 सीटों पर जीत दर्ज की. वहीं, ध्रुवीकरण और आक्रामक प्रचार के बाद भी बीजेपी को 70 सदस्‍यीय विधानसभा में महज 8 सीटों से संतोष करना पड़ा.

केतकर ने बीजेपी की हार के बताए दो कारण
ऑर्गेनाइजर के संपादक प्रफुल्‍ल केतकर ने लेख में लिखा है कि दिल्‍ली में विचारधारा और नजरिये (Perceptions) की लड़ाई थी. पूरे चुनाव में सीएम अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) और उनकी सरकार के खिलाफ कोई माहौल नहीं था. उनकी सरकार को बिजली और पानी बिल में कटौती का बड़ा फायदा मिला. इस पर बीजेपी ने दिल्‍ली की 1,700 अवैध कॉलोनियों (Unauthorized Colonies) को वैध घोषित कर करीब 40 लाख लोगों को फायदा पहुंचाया. लेख में बीजेपी की हार के दो प्रमुख कारण बताए गए हैं. पहला, 2015 के बाद दिल्‍ली में बीजेपी ने जमीनी स्‍तर पर मेहनत नहीं की और दूसरा प्रचार अभियान आखिरी समय में शुरू किया गया. इसीलिए बीजेपी चुनाव में अच्‍छा प्रदर्शन नहीं कर पाई.‘हर चुनाव में अलग क्‍यों रहता है मत-प्रतिशत’
केतकर ने लेख में कई सवाल भी उठाए हैं. उन्‍होंने पूछा है कि अन्‍य राज्‍यों के मुकाबले दिल्‍ली में अलग-अलग चुनावों में मत-प्रतिशत अलग क्‍यों रहता है? उन्‍होंने खुद ही इसका जवाब भी दिया है कि दिल्‍ली में लोगों का नजरिया बदल रहा है. लोगों की सरकार से अपेक्षाएं बदल रही हैं. पारंपरिक तौर पर जनसंघ (Jan Sangh) के दौर से दिल्‍ली में बीजेपी का आधार काफी मजबूत रहा है, जो अब भी पार्टी के समर्थक हैं. दूसरे राज्‍यों से आए और झुग्‍गी बस्तियों में रहने वाले लोग छूट योजनाओं (Concessional Policies) के चलते पहले कांग्रेस (Congress) के वोट बैंक में तब्‍दील हो गए. लेख में जोर देकर कहा गया है कि आप के उभार के साथ कांग्रेस के पारंपरिक मध्‍य वर्गीय वोट बैंक को छोड़कर झुग्‍गी बस्तियों में रहने वाले ज्‍यादातर मतदाता (Slum-Dwellers) नई पार्टी के साथ जुड़ गए.

आर्गेनाइजर ने केजरीवाल पर उठाए कई सवाल आर्गेनाइजर के संपादकीय के मुताबिक, आप ने शाहीन बाग (Shaheen Bagh) का बहुत ही शानदार तरीके से फायदा उठाया. लेख में शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (CAA 2019) के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन को मुस्लिम कट्टरवाद (Muslim Fundamentalism) करार दिया गया है. इसमें कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल के लिए ये नया टेस्टिंग ग्राउंड (Testing Ground) बन गया. इसमें अरविंद केजरीवाल के सॉफ्ट हिंदुत्‍व (Soft Hindutva) की तरफ बढ़ते रुझान के उद्देश्‍य पर भी सवाल उठाया गया है. साथ ही पूछा गया है कि क्‍या भ्रष्‍टाचार (Corruption) के खिलाफ आंदोलन से उभरी पार्टी अब भ्रष्‍टाचार के खिलाफ सख्‍त कदम उठा पाएगी. लेख में कहा गया है कि ऐसे ही कई सवाल हैं, जो अब दिल्‍ली के लोग केजरीवाल से पूछेंगे.

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