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सोनभद्र में सोने की खदान मिलने के बाद 100 टन यूरेनियम की जगी उम्मीद, कुदरी पहाड़ी पर तलाश शुरू

सोनभद्र में सोने की खदान मिलने के बाद 100 टन यूरेनियम की जगी उम्मीद, कुदरी पहाड़ी पर तलाश शुरू

सोनभद्र के म्योरपुर ब्लॉक में कुदरी पहाड़ी पर यूरेनियम की खोज में चल रहा सर्वेक्षण

सोनभद्र (Sonbhadra) के म्योरपुर ब्लॉक के लीलासी-सांगोबांध सड़क के बीच कुदरी पहाड़ी पर करीब 100 टन यूरेनियम (Uranium) मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके प्रमाण ढूंढने के लिए पहाड़ी पर कुछ जगह खुदाई भी की जा रही है.

सोनभद्र. देश की सबसे बड़ी सोने की खदान मिलने के बाद उत्तर प्रदेश का सोनभद्र सुर्खियों में है. जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) से लेकर सरकार यहां तेजी से खनन की प्रक्रिया शुरू करने की कवायद कर रही हैं. वैसे सोने की खदान के साथ ही जीएसआई ने अलग-अलगा ब्लॉक में 90 टन एंडालुसाइट (Andalusite), नौ टन पोटाश (Potash), 18.87 टन लौह अयस्क (Iron ore) और करीब 10 लाख टन सिलेमिनाइट (Sillimanite) के भंडार की भी खोज की है. इन सबके बीच इसी इलाके के कुदरी पहाड़ी पर केंद्रीय परमाणु ऊर्जा विभाग की टीमें भी सक्रिय हैं.

दरअसल म्योरपुर ब्लॉक के लीलासी-सांगोबांध सड़क के बीच कुदरी पहाड़ी पर करीब 100 टन यूरेनियम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके प्रमाण ढूंढने के लिए पहाड़ी पर कुछ जगह खुदाई भी की जा रही है.

हेलिकॉप्टर से भी चल रही तलाश
इस इलाके में हेलीकॉप्टर से एयरो मैग्नेटिक सिस्टम के जरिए यूरेनियम की तलाश की जा रही है. वैसे इस पहाड़ी के अलावा सोनभद्र के सटे अन्य प्रदेशों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार के जिलों में भी ये खोज चल रही है. फिलहाल भू वैज्ञानिकों को कुदरी पहाड़ी क्षेत्र पर 100 टन यूरेनियम होने का अंदेशा है, पता लगाया जा रहा है कि ये कितनी गहराई में है? उधर सोन पहाड़ी में सोने की खदान के बारे में पता चला है कि जहां खनन होना है, वह अधिकतर जमीन रिजर्व फॉरेस्ट में आती है. इस संबंध में अब जल्द ही शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है. मामले में अब सरकार को ही फैसला लेना है.फॉरेस्ट रिजर्व में आई सोने की खदान
बता दें सोन पहाड़ी पर जो जमीन चिन्हित की गई है, वह एक किलोमीटर लंबी और 4 किलोमीटर चौड़ी है. वरिष्ठ खनन अधिकारी केके राय के अनुसार सोन पहाड़ी में जहां सोने का भंडार चिन्हित किया गया है, वहां का 95 फीसदी से अधिक जमीन वन विभाग की है. बाकी की कुछ जमीनों पर निजी स्वामित्व है. जल्द ही इस संबंध में रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी. चूंकि अधिकतर जमीन रिजर्व फॉरेस्ट के तहत आती है, लिहाजा इस पर प्रदेश शासन स्तर ये ही निर्णय होगा. माना जा रहा है कि वन विभाग को इस भूमि के बदले कोई दूसरी जमीन स्थानांतरित की जाएगी.

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